स्कन्दगुप्त का जीवन परिचय व इतिहास 2022 | Skandagupta History & Biography in Hindi

स्कन्दगुप्त (अंग्रेजी : Skandagupta) प्राचीन भारत के गुप्त साम्राज्य का एक सम्राट था जिसने 455 ईस्वी से लेकर 467 ईस्वी तक शासन किया। उसके शासन के वक्त हूण जाति के लोगों ने गुप्त साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया। हूणों को पराजित करके उसने गुप्त साम्राज्य को विघटन से बचा लिया।

आज हम स्कन्दगुप्त ‌(Skandagupta) के इतिहास को जानेंगे।

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सम्राट स्कन्दगुप्त का परिचय (Introduction to Skandagupta)

नामस्कन्दगुप्त (Skandagupta)
पिताकुमारगुप्त प्रथम
भाईपुरुगुप्त
दादाचंद्रगुप्त द्वितीय
दादीध्रुवा देवी
पूर्ववर्ती राजाकुमारगुप्त प्रथम
उत्तराधिकारी राजापुरुगुप्त
धर्म हिन्दू
साम्राज्यगुप्त
शासन455 ई.-467 ई.
मृत्यु467 ई. के बाद के वर्षों में

स्कंदगुप्त के पिता कुमारगुप्त प्रथम थे जो कि गुप्त साम्राज्य के एक सम्राट थे। उसकी माता राज्य की एक छोटी रानी थी। स्कंदगुप्त का एक अर्द्ध (सौतेला) भाई था जिसका नाम पुरुगुप्त था। पुरुगुप्त की माता अनंता देवी था।

स्कंदगुप्त की माता के बारे में कई अवधारणाएं हैं। स्कंदगुप्त के भिटारी के शिलालेख में उसकी माता का नाम नहीं बताया गया है जबकि उसकी दादी व परदादी के नाम बताए गए हैं। जिससे कुछ लोग मानते हैं कि उसकी माता एक शूद्र तथा एक छोटी रानी थी।

कुछ इतिहासकारों ने इस तथ्य को ठुकराया है। वे समझते हैं कि स्कंदगुप्त की‌ विजय होने के बाद वह सबसे पहले अपनी मां से मिलने गया था और खुशी के कारण उनकी आंखें आंसुओं से भर आई थी।

यह घटना उसकी माता के विशेष प्रभाव व पद का व्याख्यान करती है। इस घटना की तुलना भगवान कृष्ण और देवकी से की है। क्योंकि कृष्ण विजय पाने के बाद अपनी माता देवकी से मिलने गए थे।

Skandagupta Biography in Hindi स्कन्दगुप्त का जीवन परिचय
स्कन्दगुप्त का जीवन परिचय व इतिहास (Skandagupta biography & history in Hindi)

स्कंदगुप्त का शासन (Reign of Skandagupta)

भिटारी अभिलेख के मुताबिक स्कंदगुप्त के पिता के देहांत हो जाने के बाद उसने 455-456 ईस्वी (136 वां गुप्त वर्ष) को गुप्त वंश की राजगद्दी पर बैठा।

राजा बनने के शुरुआती समय में ही उसे हूण जातियों के आक्रमण का सामना करना पड़ा। हूण उस समय बहुत शक्तिशाली और धनवान बन गए थे। जो समुद्रगुप्त (Skandagupta) के लिए बहुत बड़ी समस्या बन चुके थे। 

उन्होंने उसके पिता कुमारगुप्त प्रथम के शासन के समय से ही राज्य की कुछ अंगों पर अधिकार कर लिया था। वह राज्य के उन ‌‌‍भागों को वापिस पाना चाहता था।

स्कंदगुप्त ने एक रात नग्न धरती पर बिताई और अगले दिन भयंकर युद्ध करके उसने हूणों को हरा दिया। इस विजय के बाद वह अपनी विधवा मां से मिलने गया।

हूणों को पुष्यमित्र या म्लेच्छ भी कहा गया है। पुराणों के अनुसार, हूण नर्मदा नदी के किनारों के क्षेत्र में रहते थे। कुछ मतों के अनुसार, स्कंदगुप्त ने अपने पिता की मृत्यु के बाद सैन्य बल से राज सिंहासन पर अधिकार कर लिया। तथा उसने खुद को गुप्त साम्राज्य का सम्राट घोषित किया। 

स्कंदगुप्त व हूणों के मध्य युद्ध (Battle Between Skandagupta & Hunas)

कुमारगुप्त प्रथम के शासन के अंतिम वर्षों में हूणों ने अपना विद्रोह तेज कर दिया था। उस समय स्कंदगुप्त राजकुमार था। उन्होंने आक्रमण की योजना बना ली थी।

एक धारणा के मुताबिक, स्कंदगुप्त को हूणों को दबाने के लिए भेजा गया था। पीछे से, राजधानी में उसके पिता कुमारगुप्त प्रथम का देहांत हो गया। जिसकी वजह से उसे वापस राजधानी जाकर राज सिंहासन पर अधिकार जमाना पड़ा। 

उसने हूणों को अपनी भयंकर प्रताप और वीरता से कुचल दिया। इस विजय के बाद वह सीधा अपनी माता से मिलने गया था। हूणों का आक्रमण लगभग 455-456 ई. को हुआ था यानी कि उसके राजा बनने से पहले।

स्कंदगुप्त ने शौर्य व ताकत से हूणों को हराकर अपने शासन को ही नहीं बल्कि राज्य की प्रजा को भी भयंकर अन्याय व अशांति से बचा लिया। जूनागढ़ अभिलेख पर भी हूणों के इस आक्रमण का पता चलता है। 

हूणों से युद्ध के बाद स्कंदगुप्त (Skandagupta after the War against Hunas)

स्कंदगुप्त ने विजय प्राप्त करने के बाद सभी राज्यों पर गवर्नर बैठाये। सौराष्ट्र (वर्तमान गुजरात) से हूणों के विद्रोह का उद्भव हुआ था। तो वहाँ पर उसने अपने विशिष्ट गवर्नर प्रणदत्ता को भेजा।

जूनागढ़ स्तंभ के अभिलेख में लिखा गया है कि सौराष्ट्र का गवर्नर बनने के लिए कुछ असामान्य योग्यताएं चाहिए थी। वह योग्यताएं सिर्फ प्रणदत्ता में थी। जिसके कारण उसे सौराष्ट्र का गवर्नर बनाया गया। 

प्रणदाता के गवर्नर बनने के बाद उसने अपने पुत्र चक्रपालित को गिरीनगर शहर (वर्तमान जूनागढ़-गिरनार क्षेत्र) का मजिस्ट्रेट बनाया। यह क्षेत्र सौराष्ट्र की राजधानी मानी जाती है। चक्रपालित ने सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण करवाया जो कि सर्वप्रथम चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा बनवाई गई थी।

बाद में उसके पोते सम्राट अशोक ने इस झील का पुनरुद्धार किया। लगभग 150 ईस्वी में रुद्रामन ने भी इस झील को पुनर निर्मित करवाया। परंतु 456-457 में यह झील नष्ट हो गई थी जिसे चक्रपालित ने पुनर निर्माण करवाया।

अभिलेख में बताया गया है कि चक्रपालित ने बहुत सारा धन इस झील को बनाने में लगा दिया था और उसने वहीं भगवान विष्णु के मंदिर का भी निर्माण करवाया था।

स्कंदगुप्त के सोने के सिक्के
स्कंदगुप्त के सोने के सिक्के
(Image source: Wikipedia)

स्कंदगुप्त के सिक्के (Coins of Skandagupta)

स्कंदगुप्त ने अपने पिता कुमारगुप्त की तुलना में बहुत कम सिक्के जारी किए। उसके सिक्कों में सोने की कम मात्रा लगाई गई जिससे ऐसा लगता है कि उसने बहुत सारे युद्ध किए थे। और उन युद्धों के कारण राज्य के राजकोष पर पर प्रभाव पड़ा। सोने व धन के अभाव के कारण शायद उसने कम सिक्के जारी करवाए थे।

स्कंदगुप्त के 5 प्रकार के सोने के सिक्के (Gold Coins of Skandagupta)

  1. धनुर्धारी
  2. राजा और रानी
  3. छत्र
  4. शेर कातिल
  5. घुड़सवार

स्कंदगुप्त के 4 तरह के चांदी के सिक्के (Silver coins of Skandagupta)

  1. गरुड़
  2. सांड
  3. अल्तार
  4. मध्य देश

उसके पिता के समय जारी हुए सिक्कों का वजन लगभग 8.4 ग्राम बताया गया है परंतु स्कंदगुप्त के सिक्के 9.2 ग्राम के मिले हैं।

स्कंदगुप्त की मृत्यु (Death of Skandagupta)

स्कंदगुप्त की मृत्यु 467 ईस्वी के बाद हुई थी। उसकी मृत्यु के निश्चित वर्ष का कहीं उल्लेख नहीं है। उसने 467 ईस्वी तक गुप्त साम्राज्य पर शासन किया था, उसके बाद उसने शासन छोड़ दिया था।

कुछ इतिहासकार यह भी बताते हैं कि उसने 467 ईस्वी के बाद तक भी शासन किया था परंतु इस बात के कहीं साक्ष्य नहीं मिले हैं। 

उत्तराधिकारी (Successor)

स्कंदगुप्त ने 467-468 ईस्वी (गुप्त वंश का 148 वें वर्ष) तक शासन किया। स्कंदगुप्त के बाद उसका भाई पुरुगुप्त गुप्त साम्राज्य के सिंहासन पर बैठा जो उसका सौतेला भाई था। पुरुगुप्त कुमारगुप्त प्रथम व अनंता देवी का पुत्र था।

ऐसा कहा जाता है कि पूरुगुप्त की माता एक विशिष्ट रानी थी जिसके कारण पुरुगुप्त राजा बन पाया। पिता कुमारगुप्त प्रथम की मृत्यु के समय संभवतया पूरुगुप्त एक छोटा बालक था जिसकी वजह से स्कंदगुप्त (Skandagupta) सम्राट बना था।

पुरुगुप्त (467 ई.-473 ई.), कुमारगुप्त द्वितीय (473 ई.-476 ई.), बुद्धगुप्त (476 ई.-495 ई.?) और नरसिम्हागुप्त जैसे दुर्बल शासकों ने गुप्त साम्राज्य को विघटन की ओर पहुंचाया। 

सम्राट स्कंदगुप्त (Skandagupta) गुप्त साम्राज्य का एक अमूल्य सम्राट था जिसके अंदर एक प्रतापी शासक के गुण थे। उसको खोने के बाद गुप्त साम्राज्य विघटन की ओर चलता गया। लगभग 50 वर्षों के बाद हूणों ने भारत पर लगातार आक्रमण किए जिससे गुप्त साम्राज्य लुप्त हो गया।

सम्बंधित पुस्तकें

             

FAQs

स्कन्दगुप्त किसकी रचना है?

साहित्यकार जयशंकर प्रसाद ने स्कन्दगुप्त नाटक की रचना की थी।

स्कन्दगुप्त कौन था?

स्कंदगुप्त (अंग्रेजी : Skandagupta) प्राचीन भारत के गुप्त साम्राज्य का एक सम्राट था जिसने 455 ईस्वी से लेकर 467 ईस्वी तक शासन किया। उसके शासन के वक्त हूण जाति के लोगों ने गुप्त साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया। हूणों को पराजित करके उसने गुप्त साम्राज्य को विघटन से बचा लिया।

स्कन्दगुप्त किसका बेटा था?

स्कंदगुप्त कुमारगुप्त प्रथम का बड़ा बेटा था जिसने अपने पिता के देहांत के बाद गुप्त वंश को संभाला। सम्राट बनने के तुरंत बाद ही उसे हूणों का सामना करना पड़ा। स्कन्दगुप्त ने अपनी रणनीति से हूणों को हरा दिया जिससे उसे अखंड प्रसिद्धि प्राप्त हुई।

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