स्टीव जॉब्स का जीवन परिचय 2022 | Steve Jobs Biography in Hindi

स्टीव जॉब्स (अंग्रेजी: Steve Jobs) एक प्रतिभाशाली अविष्कारक तथा उद्यमी थे। वे एप्पल कंपनी के सह-संस्थापक थे। वे काफी लंबे समय तक कंपनी के मुख्य एग्जीक्यूटिव अधिकारी (CEO) भी रहे।

स्टीव का जन्म अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन फ्रांसिस्को शहर में हुआ था। 1976 में उन्होंने स्टीव वोजनियाक व रोज के साथ एप्पल कंपनी को स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने मैकिनटोश कंप्यूटर का निर्माण किया जिसकी वजह से उन्हें प्रसिद्धि प्राप्त हुई। 

धीरे-धीरे उन्होंने कंपनी में अन्य प्रोडक्ट्स का आविष्कार किया और कंपनी को सफलता की ऊंचाइयों तक ले कर गए। 5 अक्टूबर 2011 को 56 वर्ष की उम्र में ट्यूमर के कारण स्टीव (Steve Jobs) की मृत्यु हो गई।

स्टीव जॉब्स (Steve Jobs)
स्टीव जॉब्स

स्टीव जॉब्स का परिचय (Introduction to Steve Jobs)

नाम (Name) स्टीव जॉब्स (Steve Jobs)
पूरा नाम (Full name)स्टीव पॉल जॉब्स
जन्म (Birth)24 फरवरी 1955, सैन फ्रांसिस्को शहर, कैलिफोर्निया, अमेरिका
दत्तक माता (Adoptive mother)क्लारा जॉब्स (Clara Jobs)
दत्तक पिता (Adoptive father)पोल जॉब्स (Paul Jobs)
जैविक माता (Biological mother)जोआन शिबल (Joanne Schieble)
जैविक पिता (Biological father)अब्दुलफतह जंदाली (Abdulfattah Jandali)
बहिन (Sister)मोना सिंपसन
पत्नी (Wife)लोरेन पॉवेल (1991 में शादी)
साथी (Partner)क्रिशन्न ब्रेनन
पुत्र (Son)रीड जॉब्स
पुत्री (Daughter)लिसा ब्रेनन्न जॉब्स, एरिन जॉब्स, इव जॉब्स
धर्म (Religion)ईसाई
सह-संस्थापक (Co-founder)एप्पल कंपनी
प्रसिद्धि का कारण (Reason of Fame)आविष्कारक, उद्यमी, एप्पल कंपनी के सह-संस्थापक तथा सीईओ, नेक्स्ट कंपनी के संस्थापक
मृत्यु (Death)5 अक्टूबर 2011, पलो अल्टो, केलिफोर्निया, अमेरिका
उम्र (Age)56 वर्ष
स्टीव जॉब्स का जीवन परिचय (Steve Jobs Biography in Hindi)
स्टीव जॉब्स का जीवन परिचय (Steve Jobs biography in Hindi)

स्टीव जॉब्स का जन्म 24 फरवरी 1955 को सैनफ्रांसिस्को (कैलिफोर्निया, अमेरिका) में हुआ था। उनके जन्म के कुछ महीनों के बाद उन्हें पोल व क्लारा जॉब्स ने गोद ले लिया था। पॉल व क्लारा जॉब्स, स्टीव जॉब्स के माता-पिता बने। स्टीव के वास्तविक पिता अब्दुल फतह जंदाली तथा माता जोआन शिबल थी।

अब्दुल फतह सीरिया देश के अरब मुसलमान थे जोकि विस्कंसिन यूनिवर्सिटी से अपनी पीएचडी कर रहे थे। तो उस दौरान वो जोआन शिबल से मिले। वे दोनों एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में आ गए। 

इस रिलेशनशिप से तंग आकर शिबल के पिता ने यह कहा था कि वह शिबल को काट डालेंगे अगर वह मुस्लिम लड़के के साथ रिलेशनशिप बनाए रखती है।

स्टीव का पालन-पोषण पॉल व क्लारा जॉब्स ने किया। उसने पॉल व क्लारा जॉब्स को ही अपने माता-पिता माना। उसने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वे उसके माता-पिता नहीं है।

वर्ष 1989 में स्टीव जॉब्स लोरेन पॉवेल से मिले। 18 मार्च 1991 में उन्होंने विवाह कर लिया। स्टीव व पावेल का पहला बच्चा ‘रीड’ था जिसका जन्म सितंबर 1991 में हुआ था। पॉवेल ने अगस्त 1995 में एरिन तथा मई 1998 में इव को जन्म दिया।

स्टीव जॉब्स का जन्म (Birth of Steve Jobs)

जोआन शिबल अब्दुल फतह के साथ गर्मी की छुट्टियों में सीरिया गई हुई थी। वहां से वह वापिस सैन फ्रांसिस्को आ गई। अब्दाली ने बताया कि वह उसे बिना बताए ही सैन फ्रांसिस्को चली गई थी। उसे भी यह पता नहीं था कि वह कि वह गर्भवती थी।

24 फरवरी 1955 को सैन फ्रांसिस्को में शिबल ने स्टीव को जन्म दिया। उसके जन्म के बाद उसे शिबल ने गोद देने के लिए रास्ता चुना। वह अपने बच्चे को ऐसे पारिवारिक लोगों को गोद देना चाहती थी जो कैथोलिक हो, अच्छे पढ़े-लिखे हो और धनवान हो। 

इस बच्चे को गोद लेने के लिए पॉल और क्लारा जॉब्स ने हामी भरी। परंतु शर्तों के मुताबिक पोल व क्लारा के पास कॉलेज शिक्षा नहीं थी जिसकी वजह से शिबल ने एडॉप्शन पेपर पर साइन करने से मना कर दिया और वह केस को कोर्ट में ले गई।

पोल व क्लारा ने बच्चे की कॉलेज की शिक्षा की फीस भरने तक की बात कही जिसकी वजह से शिबल ने एडॉप्शन पेपर पर साइन किए।

इस अधिग्रहण के बाद स्टीव के माता व पिता पॉल व क्लारा जॉब्स बन गए। क्लारा ने बताया कि स्टीव एक जटिल बच्चा था और शायद उसे गोद ले करके उन्होंने गलती कर दी और उसे वापस लौटना चाहा था। 

जब कभी पॉल व क्लारा अपने आपको स्टीव के दत्तक माता-पिता बताते तो स्टीव इससे परेशान हो जाता। वह हमेशा ही उन्हें अपना 1000% माता-पिता मानता था।

स्टीव जॉब्स का बचपन (Childhood of Steve Jobs)

स्टीव के पिता पोल एक मेकिनिस्ट (इंजीनियर) थे। 1957 में उन्होंने पेट्रिशिया को भी गोद ले लिया जो स्टीव की बहन बन गई। अब उनका परिवार मोंटा लोमा, माउंटेन व्यू के पास में चला गया।

पॉल एक अच्छे इंजीनियर होने के कारण उपकरणों से जुड़ा हर कुछ बना सकते थे। उनको अगर किसी भी चीज की जरूरत पड़ती तो वह उसे बना लेते थे। परिवार में इंजीनियरिंग का ऐसा माहौल देखकर के स्टीव की इलेक्ट्रॉनिक्स व इंजीनियरिंग में रुचि बढ़ने लगी।

परंतु, उन्होंने स्कूल लाइफ में दोस्त नहीं बनाए और वह हमेशा अकेले ही रहा करते थे। स्टीव स्कूल में बहुत ज्यादा बोर हो जाते थे और वे शरारत में शामिल हो जाते थे। 

पढ़ाई में कमजोर इस बच्चे को देखते हुए टेडी नाम की एक अध्यापिका ने स्कूल में पढ़ाई हुई चीजों को सीखने और याद करने के लिए कुछ पैसे देने शुरू कर दिए। जिससे स्टीव ने ज्यादा से ज्यादा मेहनत करके अच्छा से अच्छा कार्य करना शुरू कर दिया।

1967 में जॉब्स (Steve Jobs) के पिता ने लोस एल्टोस, कैलिफोर्निया में घर खरीदने के लिए अपनी सारी बचत लगा दी। नए घर लेने के बाद स्टीव को अच्छे कॉलेज स्कूल में भी भेजा जा सका क्योंकि पास में ही उनके एक बहुत अच्छा स्कूल था।

स्टीव जॉब्स की शिक्षा (Education of Steve Jobs)

स्टीव जॉब्स जब अपने पूरे परिवार के साथ लोस एल्टोस (कैलिफोर्निया) में चले गए तो वहां पर स्टीव ने होमस्टेड हाई स्कूल ज्वाइन किया। यह हाई स्कूल सिलिकॉन वैली से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ था।

जॉब्स ने 1968 में बिल फर्नांडीज के साथ होमस्टेड हाई स्कूल में प्रथम वर्ष में एडमिशन लिया। बिल ने उन्हें स्टीव वोजनियाक से मिलाया। वोजनियाक व जॉब्स गहरे दोस्त बन गए। बाद में, उन्होंने ही एप्पल कंपनी की स्थापना की।

धीरे-धीरे स्टीव का क्लास में इंटरेस्ट कम होता चला गया और उन्होंने अपने बाल लंबे रखने शुरू कर दिए। हाई स्कूल में उन्होंने अपने सिलेबस में रुचि कम दिखाते हुए साहित्यिक पुस्तकों को पढ़ना शुरू कर दिया। उनकी रूचि इलेक्ट्रॉनिक्स व साहित्य में बन चुकी थी। हाई स्कूल के अंतिम वर्ष में उनके एक दोस्त वोजनियाक व एक गर्लफ्रेंड क्रिसैन ब्रेनन थी।

1971 में स्कूल से पास आउट होने के बाद, 1972 में स्टीव पोर्टलैंड के रीड कॉलेज में दाखिल हुए। यह कॉलेज काफी महंगा था जो स्टीव के माता-पिता के लिए मुश्किल था। एक सेमेस्टर के बाद स्टीव ने अपने माता-पिता को बिना बताए ही कॉलेज छोड़ दिया। कॉलेज छोड़ने के बाद उन्होंने बताया कि वह अपने माता-पिता के पैसों को ऐसी शिक्षा पर बर्बाद नहीं करना चाहते जो उनके लिए किसी काम की नहीं है।

कॉलेज से ड्रॉपआउट होने के बाद उन्होंने कैलीग्राफी सीखने के लिए एक कोर्स लिया। इस कैलीग्राफी के कोर्स से उन्होंने फौंट्स को अच्छा बनाने के लिए बहुत सारी चीजें सिखी। 

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स्टीव जॉब्स कॉलेज से ड्रॉप आउट होने के बाद (Steve Jobs after dropping out of college)

कॉलेज छोड़ने के बाद, स्टीव जॉब्स 1974 में लोस एल्टोस में वापस अपने घर आ गए और वहां काम की तलाश करने लग गए। उन्हें अटारी नामक कंपनी ने टेक्नीशियन की जॉब दी। इस जॉब से उन्होंने पैसे एकत्रित किए और भारत में यात्रा पर जाने की योजना बनाई। 

वह अपने दोस्त के साथ 1974 में आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए भारत आए। 7 महीने तक यहां पर रहने के बाद वापस अमेरिका चले गए। अटारी कंपनी में वापस आने पर उन्हें चिप के कार्य के लिए $100 देने को कहा गया। स्टीव (Steve Jobs) को सर्किट के बारे में ज्यादा नॉलेज नहीं था तो उन्होंने अपने दोस्त वोजनियाक से कहा कि वह अगर उसकी मदद करेगा तो उसे 50% हिस्सा दे देंगे।

एप्पल कंपनी की स्थापना (Founding Apple Company)

मार्च 1976 में वोजनियाक ने एप्पल प्रथम कंप्यूटर का निर्माण किया और उसे स्टीव जॉब्स को दिखाया। उसी साल अप्रैल के महीने में स्टीव जॉब्स, वोजनियाक तथा रोनाल्ड वायने ने एप्पल कंपनी की स्थापना की।

कंपनी की सारी प्रक्रियाएं स्टीव के बेड रूम के अंदर होती थी फिर बाद में गैरेज के अंदर ले जाया गया। रोनाल्ड वायने कंपनी में बहुत कम दिनों तक ही ठहरे और स्टीव व वोजनियाक को मुख्य रूप से कोफाउंडर व संचालक बने रहने दिया।

कंपनी को सफलतापूर्वक चलाने के लिए उन्हें पैसे की जरूरत थी तो वोजनियाक ने अपना एचपी का केलकुलेटर बेच दिया और जॉब्स ने अपनी वॉल्सवैगन वेन बेच दी।

कंपनी ने एप्पल प्रथम नाम का एक कंप्यूटर बनाया और उसके कई सारी ईकाइयाँ बेच दी जिससे कंपनी में धीरे-धीरे कमाई शुरू होने लगी। कंपनी पब्लिक हो गई और स्टीव एक मिलिनेयर बन गए। 24 जनवरी 1984 को स्टीव ने मैकिनटोश कंप्यूटर को लॉन्च किया। 

यह कंप्यूटर काफी महंगा था तो मध्यम वर्ग के लोग इसे खरीद नहीं पा रहे थे और आईबीएम के कंप्यूटर ज्यादा बिकते जा रहे थे। उसी समय में माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज सॉफ्टवेयर आईबीएम के कंप्यूटर में आने लग गए और मैकिनटोश कंप्यूटर का मार्केट शेयर नीचे गिरता गया।

स्टीव को एप्पल कंपनी से निकालाना व वापस लाना (Steve Jobs got fired from Apple and get back)

कंपनी को नुकसान में जाता हुआ देख स्कली नाम के एक बोर्ड डायरेक्टर ने जॉब्स को सीईओ के पद से हटा दिया। जिसके बाद जॉब्स ने कंपनी से रिजाइन दे दिया। माइक्रोसॉफ्ट की विंडोज सॉफ्टवेयर इतनी अच्छी थी कि आम लोग उसे खरीद भी पा रहे थे और अच्छा अनुभव भी पा रहे थे।

मैकिनटोश कंप्यूटर का हिस्सा मार्केट में बहुत नीचे चला गया और माइक्रोसॉफ्ट बहुत तेजी से ग्रोथ करने लग गई। 

स्टीव जॉब्स के साथ ही उनके कुछ कर्मचारियों ने भी कंपनी से रिजाइन दे दिया। 

कंपनी से रिजाइन के बाद स्टीव ने 1985 में नेक्स्ट नाम की कंपनी को स्थापित किया। इस कंपनी में कुछ ही महीनों के बाद स्टीव को पैसों की जरूरत पड़ी और रोस पेराट नाम के एक बिलेनियर ने उनकी कंपनी में बहुत ज्यादा इन्वेस्ट किया। 

उनकी इस नेक्स्ट कंपनी ने एक कंप्यूटर लॉन्च किया जिसे जॉब के कमबैक इवेंट के रूप में जाना गया।

नेक्स्ट कंपनी के बनाए हुए कंप्यूटर मुख्यतया फाइनेंस, वैज्ञानिक. शैक्षणिक समुदाय व नई तकनीकी प्रायोगिकी के लिए थे। यह कंप्यूटर लगभग $10,000 के बराबर मूल्य का था जो बहुत महंगे था। 

1997 में नेक्स्ट कंपनी को एप्पल ने खरीद लिया। इस डील के बाद स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) को ही एप्पल कंपनी के सीईओ के रूप में चुना गया।

कंपनी के सीईओ बनने के बाद स्टीव ने बहुत सारे अनवांछित प्रोडक्ट्स के प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया और कुछ ही चीजों पर ध्यान रखा। इसके बाद उन्होंने आईमैक, आईपैड और आईफोन जैसे ही महत्वपूर्ण प्रोडक्ट्स को बहुत ही शानदार यूजर बिहेवियर देने की कोशिश की। एप्पल की बहुत अच्छी ब्रांडिंग व ग्राहक को पूर्णतया गुणवत्ता से भरी हुई चीज देना ही बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ।

स्टीव जॉब्स की मृत्यु (Death of Steve Jobs)

अक्टूबर 2003 में यह पता चला कि स्टीव जॉब्स को कैंसर हो गई है। 24 अक्टूबर 2011 को वे अपने आप एप्पल कंपनी के सीईओ से चेयरमैन बन गए और टिम कुक को अगला सीईओ बनाया। इसके 6 सप्ताह तक जॉब्स एप्पल कंपनी में काम करते रहे।

5 अक्टूबर 2011 को 3:00pm बजे स्टीव जॉब्स की पलो अल्टो (अमेरिका) में अपने घर में मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु का कारण इसलेट सेल टयूमर था। 

एप्पल व पिक्सर दोनों कंपनियों ने उनकी मृत्यु की घोषणा की और उस दिन के लिए एप्पल ने अपनी पब्लिक सेवा बंद की।

एप्पल व माइक्रोसॉफ्ट इन दोनों कंपनियों के कैंपस व हेडक्वार्टर पर अमेरिकन झंडे फहरा रहे थे।

स्टीव जॉब्स के अनमोल वचन (Quotes of Steve Jobs in Hindi)

स्टीव ने अपने जीवन में बहुत सारी चीजें सीखी और उन्हीं बातों को अपने विचारों के माध्यम से साझा किया। स्टीव जॉब्स के अनमोल विचार –

“अगर आज मेरी जिंदगी का अंतिम दिन होता तो क्या मैं वह कार्यकर्ता जो मुझे आज करना है।”

“कभी कभार जिंदगी तुम्हारे दिमाग के ऊपर ईंट से मारेगी, तुम्हें हार नहीं माननी है।”

“भूखे रहो, मूर्ख रहो।”

स्टीव के अन्य अनमोल वचन यहां पढ़ें – स्टीव जॉब्स के अनमोल वचन

बार-बार पूछे गए प्रश्न (FAQ’s)

स्टीव जॉब्स के प्रेरक विचार बताइए।

स्टीव जॉब्स के प्रेरक विचार –
1. “अगर आज मेरी जिंदगी का अंतिम दिन होता तो क्या मैं वह कार्यकर्ता जो मुझे आज करना है।”
         2. “कभी कभार जिंदगी तुम्हारे दिमाग के ऊपर ईंट से मारेगी, तुम्हें हार नहीं माननी है।”
         3. “भूखे रहो, मूर्ख रहो।”

स्टीव जॉब्स का जन्म कब हुआ था?

स्टीव जॉब्स का जन्म 24 फरवरी 1955, सैन फ्रांसिस्को शहर, कैलिफोर्निया, अमेरिका में।

स्टीव जॉब्स की पत्नी का नाम क्या है?

स्टीव जॉब्स की पत्नी लोरेन पॉवेल थी। उनकी शादी 1991 में हुई थी।

स्टीव जॉब्स के कितने बेटे व बेटियाँ हैं?

स्टीव जॉब्स के 1 बेटा व 3 बेटिया हैं। उनके बेटे का नाम रीड जॉब्स है तथा बेटियों के नाम लिसा ब्रेनन्न जॉब्स, एरिन जॉब्स, इव जॉब्स हैं।

क्या स्टीव जॉब्स जिंदा हैं?

नहीं, स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) आज जिंदा नहीं हैं। 5 अक्टूबर 2011 को 3:00pm बजे स्टीव जॉब्स की पलो अल्टो (अमेरिका) में अपने घर में मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु का कारण इसलेट सेल टयूमर था।

यह भी पढ़ें – वारेन बुफे अनमोल विचार

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