पुतलीबाई गांधी का जीवन परिचय व इतिहास 2022 | Putlibai Gandhi History and Biography in Hindi

पुतलीबाई गांधी (अंग्रेजी: Putlibai Gandhi) महात्मा गांधी की माता तथा करमचंद गांधी की चौथी पत्नी थी। पुतलीबाई एक धार्मिक स्त्री थी जिनकी भगवान में बहुत गहरी आस्था थी। वह रोजाना ईश्वर के मंदिर में जाया करती थी। 

जन्म से हिंदू होने के कारण उन्होंने परंपरागत हिंदू तौर-तरीकों को अपना लिया था। वे चतुर्मास में हमेशा सूर्य भगवान को देखकर ही खाना खाया करती थी। दिन में एक बार भूखा रहना तो उनके लिए बच्चों का खेल था। इन सब का कारण उनकी ईश्वर में गहरी आस्था थी।

इस पोस्ट में हम पुतलीबाई गांधी के जीवन परिचय एवं उनके इतिहास (Biography and history of Putlibai Gandhi in Hindi) के बारे में बात करेंगे।

पुतलीबाई गांधी (Putlibai Gandhi)
पुतलीबाई गांधी (Putlibai Gandhi)

पुतलीबाई गांधी का परिचय (Introduction to Putlibai Gandhi)

नाम (Name)पुतलीबाई गांधी (Putlibai Gandhi)
जन्म (Birth)1844 ईस्वी, दंतराणा, जूनागढ़ प्रांत, ब्रिटिशकालीन भारत
पति (Husband)दीवान करमचंद गांधी
पुत्र (Son)लक्ष्मीदास, करसनदास, महात्मा गांधी (मोहनदास) 
पुत्री  (Daughter)रलिअत बहन (Raliatbehn)
पौत्र (Grandsons)हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
सास (Mother-in-law)लक्ष्मीबाई गांधी
ससुर (Father-in-law)उत्तमचंद गांधी
कार्य (Job)गृहणी, ईश्वर की भक्ति
धर्म (Religion)हिंदू
प्रसिद्धि का कारण महात्मा गांधी की माता
मृत्यु (Death)12 जून 1891, ब्रिटिश इंडिया
उम्र (Age)47 वर्ष
पुतलीबाई गांधी का जीवन परिचय व इतिहास (Putlibai Gandhi History and Biography in Hindi)
पुतलीबाई गांधी का जीवन परिचय (Putlibai Gandhi biography in Hindi)

पुतलीबाई गांधी जन्म 1844 ईस्वी को दंतराणा में ब्रिटिशकालीन भारत में हुआ था। पुतलीबाई मोहनदास करमचंद गांधी की माता थी। वह राजकोट के तत्कालीन दीवान करमचंद गांधी की चौथी पत्नी थी। 

करमचंद गांधी की पहली दो बीवियों की किसी बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी। उसके बाद करमचंद ने तीसरा विवाह किया। 

परंतु, तीसरा विवाह करने के बाद उन्हें कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई जिससे वह हताश हो गए और उन्होंने अपनी तीसरी पत्नी से यह अनुमति मांगी कि वह एक और विवाह करना चाहते हैं। उनकी पत्नी ने अनुमति दे दी और उसके बाद करमचंद गांधी ने पुतलीबाई गांधी से विवाह किया।

पुतलीबाई अपने पति करमचंद गांधी से 22 वर्ष छोटी थी।

वह हिंदू धर्म के प्रति काफी आसक्त व भगवान की परम भक्त थी जिसकी वजह से महात्मा गांधी उनसे काफी ज्यादा प्रभावित हुए थे। 

पुतलीबाई पूजा कार्यक्रम समाप्त होने से पहले कभी भी भोजन ग्रहण नहीं करती थी। वह प्रभु के मंदिर में हमेशा जाया करती थी और महीने की शुक्ल एकादशी को व्रत रखा करती थी।

वह भक्ति से बहुत गहनता से जुड़ी हुई थी। उन्होंने अपने जीवन में इसके लिए कई सारे नियम बनाए व व्रत रखे।

कभी कभार जब सूर्य बादलों के पीछे छुप जाया करता था और पूरे दिन भर सूर्य नहीं निकलता था तो वह भूखे पेट भी अपना दिन गुजार लिया करती थी।

पुतलीबाई गांधी की संताने (Children of Putlibai Gandhi)

पुतलीबाई गांधी (Putlibai Gandhi) एवं करमचंद गांधी की चार संताने थी जिनमें से तीन बेटे और एक बेटी थी। पुतलीबाई के बेटे लक्ष्मीदास, कृष्णदास व मोहनदास थे तथा उनकी बेटी रलिअत बहन (Raliatbehn) थी।

मोहनदास उनके सबसे छोटे बेटे थे जिन्हें वह “मोनिया” कहकर पुकारा करती थे। मुख्यतः यह नाम उन्होंने अपने छोटे बेटे के लाड़-प्यार में रखा था।

उनकी संतानों में सबसे प्रभावकारी संतान मोहनदास करमचंद गांधी थे जिन्हें आज हम सभी लोग महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं। महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में अपनी माता के बारे में व्यापक रूप से लिखा है।

जब मोहनदास अपनी पढ़ाई के लिए इंग्लैंड जा रहे थे तब उनकी माता ने उनके लिए क्या कहा था वह सब बातें भी उन्होंने लिखी है। 

पुतलीबाई गांधी के परिवार की स्थिति (Conditions of Putlibai Gandhi’s Family)

पुतलीबाई गांधी ने 1857 में करमचंद गांधी से विवाह किया था। उस समय पुतलीबाई की उम्र मात्र 13 वर्ष थी जबकि करमचंद की उम्र 35 वर्ष थी। 

उस समय में करमचंद गांधी सिविल सर्वेंट थे जिन्हें दीवान के नाम से जाना जाता था। उससे पहले वे पोरबंदर के शाही परिवार को सलाह मशवरा देते तथा अन्य सरकारी अधिकारियों को हायर करते थे। करमचंद को पोरबंदर में मुख्य मंत्री के रूप में चुना गया था।

इतने अच्छे पद पर होने के बाद भी करमचंद को ज्यादा धन नहीं मिला। हालांकि उनके पास कई सारे नौकर खाने-पीने की चीजें भरपूर अच्छे फर्नीचर उपलब्ध रहते थे। 

इससे पता चलता है कि पुतलीबाई गांधी (Putlibai Gandhi) के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी थी जिसकी वजह से वह अपने बेटों को पढ़ने के लिए ब्रिटेन भेज सके थे।

महात्मा गांधी के इंग्लैंड जाने पर पुतलीबाई की चिंता (Putlibai worried about Mahatma Gandhi’s visit to England)

जब मोहनदास अपनी पढ़ाई के लिए इंग्लैंड जाना चाहते थे तो उनकी माता व पत्नी ने समझाया कि इतनी दूर क्यों जाना है, यहीं पढ़ लो। उस समय मोहनदास मात्र 18 वर्ष के थे। 

हालांकि, मोहनदास का विवाह 13 वर्ष की उम्र में ही हो गया था। उनकी पहली संतान असमय ही मृत्यु को प्राप्त हो गई और जब वह 18 वर्ष के थे तब उनकी पहली संतान हरिलाल प्राप्त हुई थी। इसी उम्र में मोहनदास इंग्लैंड में बैरिस्टर की पढ़ाई कर के वकील बनना चाहते थे। 

इंग्लैंड जाने से उनकी माता व पत्नी कस्तूरबा गांधी ने उनको रोका। महात्मा गांधी ने उन्हें वादा किया कि वह इंग्लैंड में शाकाहारी भोजन ही करेंगे, किसी भी अन्य महिला के साथ मित्रता नहीं करेंगे, और जल्द ही वापस लौट आएंगे। 

इसके बाद मोहनदास गांधी को इंग्लैंड जाने की अनुमति मिली।

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पुतलीबाई गांधी की मृत्यु (Death of Putlibai)

पुतलीबाई गांधी की मृत्यु 12 जून 1891 को ब्रिटिश कालीन भारत में हुई थी। उनकी मृत्यु के दौरान उनके पुत्र मोहनदास करमचंद गांधी इंग्लैंड में बैरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए गए हुए थे। 

पुतलीबाई की मृत्यु के समय उनकी उम्र मात्र 47 वर्ष थी। उनके पति करमचंद की मृत्यु पुतलीबाई से 6 वर्ष पूर्व 1885 में हुई थी जो उनसे 22 वर्ष बड़े थे।

FAQs

पुतलीबाई गांधी (Putlibai Gandhi) का जन्म कब हुआ था?

पुतलीबाई गांधी का जन्म 1844 को दंतराणा, जूनागढ़ प्रांत, ब्रिटिशकालीन भारत में हुआ करता था।

पुतलीबाई गांधी के पति का क्या नाम था?

पुतलीबाई गांधी के पति का नाम करमचंद गांधी था।

पुतलीबाई (Putlibai Gandhi) क्या कार्य करती थी?

पुतलीबाई गांधी एक गृहणी और ईश्वर की भक्ति में रत स्त्री थी जो हमेशा ईश्वर के प्रति आस्था रखती थी धार्मिक होने के कारण उन्होंने व्रत रखने शुरू किया। वह हमेशा ईश्वर के मंदिर में एक बार जरूर जाती थी।

पुतलीबाई गांधी का धर्म क्या था?

पुतलीबाई का हिंदू धर्म था।

पुतलीबाई गांधी की उम्र कितनी थी?

पुतलीबाई की उम्र 47 वर्ष थी। पुतलीबाई का जन्म 1844 ईस्वी को हुआ था तथा उनकी मृत्यु 12 जून 1891 को हुई थी।

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