हंबीरराव मोहिते का जीवन परिचय | Hambirrao Mohite Biography in Hindi

हंबीरराव मोहिते (अंग्रेजी: Hambirrao Mohite) मराठा साम्राज्य के एक कोहिनूर सेनापति थे। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर के संभाजी महाराज तक सेनापति का कर्तव्य निभाया। 

हंबीरराव बहुत ही विश्वासदायी तथा वफादार सेनापति थे जो स्वराज्य के स्वप्न को साकार बनाना चाहते थे। उन्होंने अपने शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के हर एक आदेश की पालना की तथा प्रजा की भलाई के बारे में सोचा।

हंबीरराव मोहिते का परिचय (Introduction to Hambirrao Mohite)

नामहंबीरराव मोहिते (Hambirrao Mohite)
जन्म1 मई 1632, तलबीड, सतारा जिला, महाराष्ट्र
पितासंभाजी मोहिते
पुत्रीताराबाई
भाईहरीफराव, शंकर जी
बहिनसोयराबाई तथा अन्नूबाई
भान्जाराजाराम प्रथम
भान्जीदीपाबाई (बालीबाई)
जीजाछत्रपति शिवाजी महाराज
प्रसिद्धि का कारणमराठा साम्राज्य के सेनापति
सेवानियुक्तमराठा साम्राज्य में
पदसेनापति
मृत्यु16 दिसंबर 1687, वाई, महाराष्ट्र
उम्र57 वर्ष

हंबीरराव मोहिते का जन्म 1 मई 1632 को तलबीड, वर्तमान सतारा जिला, महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता संभाजी मोहिते एक वफादार मुख्य नायक थे। 

हंबीरराव के 2 भाई तथा 2 बहिनें थी। उनके भाई हरीफ राव व शंकर जी थे और उनकी बहने सोयराबाई व अन्नूबाई थी।‌ मोहिते ने अपने पिता संभाजी मोहिते के सारे गुण अपना लिए थे। वह भी एक वफादार मुख्य नायक बने तथा मराठा साम्राज्य के सेनापति का कर्त्तव्य निभाया।

उनकी पुत्री का नाम ताराबाई था जिसका विवाह छत्रपति शिवाजी महाराज के छोटे पुत्र राजाराम से हुआ था। मोहिते का दोहित्र (Grandson) शिवाजी द्वितीय था।

हंबीरराव मोहिते की बहन सोयराबाई का विवाह शिवाजी महाराज के साथ किया गया था। उनकी दूसरी बहन अन्नूबाई का विवाह शिवाजी महाराज के सौतेले भाई वेंकोजी के साथ किया गया था।

हंबीरराव मोहिते शाही मराठा भेष में
हंबीरराव मोहिते
(Source: in.pinterest.com)

कोप्पल की लड़ाई में हंबीरराव मोहिते (Hambirrao Mohite in the Battle of Koppal)

हंबीरराव मोहिते के समय में कर्नाटक के कोप्पल राज्य में आदिलशाह के दो जनरल अब्दुल रहीम खान मियां तथा उनका भाई हुसैन मियां शासन करते थे। 

दोनों भाई बहुत ही निर्दयी प्रवृत्ति के इंसान थे। वे किसानों के साथ बहुत ही क्रूर व्यवहार करते थे। राज्य में फसल ना होने पर तथा अकाल पड़ने पर भी वे किसानों से पूरा कर वसूल करते थे। 

गरीब किसान उनके सामने भीख मांगते थे, परंतु वह किसी की भी नहीं सुनते थे। उन दोनों ने वहां पर आतंक मचा के रखा था।

तो कोप्पल प्रांत के किसानों ने छत्रपति शिवाजी महाराज को इसके बारे में शिकायत की। शिवाजी महाराज ने अपने सेनापति हंबीरराव को उनकी समस्या के निवारण के लिए वहां पर भेजा। 

जनवरी 1677 को छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना हंबीरराव मोहिते (Hambirrao Mohite) के नेतृत्व में आदिल शाह की सेना से भिड़ी। मोहिते तथा धनाजी जाधव ने बहुत ही वीरता दिखाई। उनकी सेना ने आदिलशाह की आधी से ज्यादा सेना को वहीं पर खत्म कर दिया। उन्होंने अब्दुल रहीम खान को मौत के घाट उतार दिया तथा हुसैन खान को बंदी बना लिया। 

शिवाजी के सौतेले भाई वेंकोजी के साथ हंबीरराव का युद्ध (Hambir Rao’s Battle Against Venkoji)

कुछ समय बाद शिवाजी महाराज दक्षिण दिग्विजय (दक्षिण प्रांत) में गए। वहां पर उनके सौतेले भाई वेंकोजी ने अपने पिता शाहजी की संपत्ति को साझा करने से मना कर दिया। जिसके बाद शिवाजी तथा वेंकोजी के बीच में युद्ध शुरू हो गया।

क्योंकि मोहिते शिवाजी की सेना के सेनापति थे तो उन्होंने वेंकोजी के कई प्रांत जैसे – जगदेवगढ़, कावेरीपत्तम, चिदंबरम और वृद्धाचलम इत्यादि पर विजय प्राप्त कर ली। वेंकोजी अपने इतने सारे प्रांत खोने के बाद निराश हो गए। 

तो वेंकोजी ने 6 नवंबर 1677 को हंबीरराव पर आक्रमण कर दिया। उस समय शिवाजी अपने पारिवारिक चिंता के कारण युद्ध क्षेत्र में उतने सक्रिय नहीं थे। परिस्थितियों को देखकर ऐसा लगा कि मोहिते इस युद्ध में हार जाएंगे।

परंतु मोहिते ने वेंकोजी की सेना पर बहुत तीव्र गति से आक्रमण किया तथा उन्हें हरा दिया। लगभग 2 महीने के बाद इस युद्ध का समापन हुआ। 

संभाजी के राज्याभिषेक में हंबीरराव मोहिते का योगदान (Contribution of Hambirrao in Coronation of Sambhaji)

3 अप्रैल 1680 को छत्रपति शिवाजी महाराज का देहांत हो गया था। उनकी मृत्यु के बाद मराठा शासन के उत्तराधिकारी का प्रश्न उठा। उनकी पत्नी सोयराबाई (हंबीरराव की बहिन) ने अपने 10 वर्षीय पुत्र राजाराम को राजसिंहासन पर बिठा दिया।

संभाजी महाराज, शिवाजी महाराज के जेष्ठ पुत्र थे। बड़े होने के नाते तत्कालीन रीति-रिवाजों के अनुसार वह ही मराठा साम्राज्य के उत्तराधिकारी बन सकते थे। अपने पिता की मृत्यु के समय संभाजी दूसरे किले में रह रहे थे। जैसे ही इस बात की सूचना संभाजी महाराज को पता चली तो उन्होंने राजाराम को हटाकर के मराठा साम्राज्य की राजगद्दी पर आधिपत्य करने की सोची।

असल में राजाराम, हंबीरराव मोहिते का भांजा था। कई देशद्रोही मंत्री भी राजाराम के साथ हो गए थे। उन्होंने संभाजी को बंदी बना लिया था। हंबीरराव ने उन सभी मंत्रियों को बंदी बनाकर के संभाजी महाराज को मुक्त करवाया और बाद में उनका राज्याभिषेक संपन्न करवाया।

बुरहानपुर के किले पर आक्रमण (Attack on Burhanpur Fort)

उस समय में बुरहानपुर उत्तर व दक्षिण भारत को व्यापारिक मार्ग से जोड़ता था। संभवतया बुरहानपुर में कई सारे पुर्तगाली लोग भी रहा करते थे। वहां के मुगल क्षेत्र-सेनापति ने स्थानीय लोगों के खिलाफ आतंक मचा रखा था। 

उन स्थानीय लोगों ने संभाजी महाराज से सहायता मांगी। 30 जनवरी 1681 को संभाजी महाराज तथा उनके सेनापति हंबीरराव मोहिते ने बुरहानपुर पर आक्रमण कर दिया। उस समय पर बुरहानपुर का सूबेदार खानजहां था और किले में मात्र दो 200 सैनिक थे।

परंतु संभाजी तथा हंबीरराव (Hambirrao Mohite) की सेना में 20,000 सैनिक थे। मुगलों के सामने इतनी बड़ी सेना को रोकने के लिए कोई ताकत नहीं थी। मराठा सैनिकों ने बुरहानपुर के सारे मुगल व्यापार केंद्रों को लूट लिया और 3 दिनों के अंदर वहां से एक करोड़ धनराशि से भी ज्यादा का सामान प्राप्त कर लिया।

हंबीरराव मोहिते की मृत्यु (Death of Hambirrao Mohite)

1686 में मुगलों तथा मराठों के बीच में वाई का युद्ध हुआ। यह युद्ध वाई प्रांत में हुआ था जिसकी वजह से इसे “वाई का युद्ध” के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में मराठा शासक संभाजी ने अपने सेनापति हंबीरराव को भेजा था तथा मुगलों की तरफ से सरजा खान था।

हंबीरराव समझदारीपूर्वक मुगलों को वाई के क्षेत्र से पहाड़ी क्षेत्र की ओर ले कर गए। वहां पर उन्हें हरा दिया तथा मराठों की विजय हुई।

दुर्भाग्यवश, 16 दिसंबर 1687 को इस वाई के युद्ध में हंबीरराव मोहिते के ऊपर तोप का गोला आकर गिर गया जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई। उस समय हंबीरराव की उम्र मात्र 57 वर्ष थी।‌ 

इस युद्ध में मराठों की विजय हुई। परंतु, मराठों ने अपनी विजय के बाद भी अपने एक बेशकीमती हीरे ‘हंबीरराव मोहिते’ को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया।

FAQS

हंबीरराव मोहिते कौन थे?

हंबीरराव मोहिते (Hambirrao Mohite) का जन्म 1 मई 1632 को महाराष्ट्र में हुआ था। वे छत्रपति शिवाजी के समय से लेकर संभाजी महाराज के समय तक मराठा सेना के मुख्य सेनापति रहे थे। उन्होंने शिवाजी महाराज के साथ मिलकर मुगलो को हराया तथा ग्रामीणों को सहायता प्रदान की। उन्होंने संभाजी महाराज के राज्य अभिषेक में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

संभाजी महाराज के राज्य अभिषेक में किसने महत्वपूर्ण कर्तव्य निभाया था?

संभाजी महाराज के राज्य अभिषेक में हंबीरराव मोहिते ने बहुत महत्वपूर्ण कर्तव्य निभाया था। उन्होंने सभी देशद्रोही मंत्रियों को बंदी बना करके उन्हें संभाजी महाराज के सामने प्रस्तुत किया।

हंबीरराव मोहिते का जन्म कब व कहां हुआ था?

1 मई 1632 को, तलबीड, वर्तमान सतारा जिला महाराष्ट्र।

हंबीरराव मोहिते की मृत्यु कब तथा कहां हुई थी?

16 दिसंबर 1686 को, वाई प्रांत, महाराष्ट्र।

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